Jupiter
29th September 2006, 08:45 PM
मूंछे, नाक और मनोबल
हर इंसान के चेहरे पर नाक होती है। शरीफ और पढे लिखे लोग इस नाक को अपनी इज्जत बताते हैं। वैसे जानवरों की भी नाक होती है, लेकिन जानवरों की नाक इंसानी नाक की तरह जब तब कटती नहीं रहती है। यह शोध का विषय हो सकता है कि इंसान को अपनी नाक कटने से अधिक पीड़ा होती है या जेब कटने से? इंसान की जेब और नाक में किस तरह का संबंध है?
इंसान की 'अनकवर्ड ' नाक उसकी प्रतिष्ठा का प्रतीक कब और कैसे बन गई यह भी शोध का विषय हो सकता है। शरीर के किसी अंग पर हमला हो या किसी का चारित्रिक पतन हो जाय लेकिन बोलचाल की भाषा में इसे प्रतिष्ठित व्यक्ति की नाक कटना ही कहा जाता है। यहां तक कि लोग घृणा मिश्रित स्वर में कहने लगते हैं , देखो उसने अपनी नाक कटा डाली।
कहने को तो यह कहा जा सकता है कि इंसान क्या जनवरों के पास तक नाक होती है। लेकिन अपने देश में राजनीतिक नाम का एक प्राणी होता है, जिसके पास नाक नहीं होती। क्या अपने कभी सुना है कि किसी नेता की नाक कट गयी? नाक तो उसी की कट सकती है जिसकी जेब भी कट सकती हो। जेब काटने वालों की नाक भला कैसे कटेगी? लेकिन आप माने या न माने , पुलिस वालों के पास भी नाक होती है, जो इंसान और जानवरों की नाक से भिन्न होती है। एक फर्क यह भी है कि पुलिस वालों की नाक जब तब कटती नहीं रहती और उनकी जेब तो खैर कभी कटती ही नहीं। या इसे यूं भी कहा जा सकता है कि उनकी नाक कट ही नहीं सकती क्योंकि उनकी नाक स्थूल नहीं होती है। इंसान की नाक टेलीविजन का वह मानीटर है जिस पर तन और मन में हो रहे परिवर्तनों को देखा जा सकता है। टेलीविजन पर दक्षिणी अफ्रीका और जिम्बाब्वे के साथ हो रहे क्रिकेट मैच के उतार -चढाव को देखकर उत्साही लोग कह रहे थे कि फलां टीम ने अपनी नाक कटा दी या फला टीम ने अपने देश की नाक ऊंची कर दी। पुलिस वालों की नाक मेन्होल का ढक्कन होती है जिसको ऊपर से देखकर भीतर बहने वाले पदार्थ का अंदाज लगाने में गङबङी हो सकती है।
नाक के नीचे आम तौर पर मूंछे पाई जाती हैं। अगर मूंछे नहीं है तो नाक के नीचे सीधे उदरस्थ करने वाला मुंह मिलेगा। मूंछे बङी खतरनाक चीज होती हैं। जिसकी जितनी बङी मूंछे होंगी उसे फर्स्ट साइट में उतना ही खतरनाक मान लिया जाता है, भले ही वह चूहा देखकर रजाई में घुस जाय। बिना मूंछ वाले किसी व्यक्ति के सामने बैठकर कोई मूंछवाला अगर नाहक ही अपनी मूंछो को ऎंठने लगे तो साहब बिना चाकू तमंचे के ही दंगा हो जायेग। सामने वाले की आंखो में अपनी आंखे डालकर अपनी मूंछो पर उंगलियां फेरना बिना घोषणा के युद्व का ऎलान है। अगर मूंछो पर उंगलियां फेरने वाला साथ में मुस्कुराता भी जा रहा हो तो यह मुस्कुराहट सीज फायर नहीं बल्कि आग मॆं घी डालने का काम करेगी। मेरे एक मित्र कहते हैं कि मूंछो पर उंगलियां फ्राते हुये मुस्कुराना वैसा ही है जैसे किसी देश पर कब्जा करने के बाद वहां के लाल किले जैसी इमारत पर झंडा रोहण करना।
मूंछ नाक और मनोबल का आपस में क्या संबंध है? किस अदृश्य नाजुक डोर से ये बंधे हैं, यह समझना टेढी खीर है। तीनों में दोस्ती या दुश्मनी का कोई रिश्ता जरूर है। संभवतः ये इंटरनेट जैसी किसी प्रणाली से जुङे हों जिसकी खोज करना अभी बाकी हो। लेकिन ऎसा क्यों होता हैकि पुलिस वालों की बङी-बङी मूंछे देखकर बिना मूंछो वालों का मनोबक तत्काल गिर जाता है। जैसे जेठ की दोपहरी में अचानक ओला गिरने से तापमान गिर जाता है। इसी तरह से शरीफ लोगों की नाक ऊंची होते देख पुलिस वालों का मनोबल पहाङ के शीर्ष से लुढकते पत्थर की तरह गिरने लगता है। जब किसी पुलिस वाले की मूंछे नीचे की तरफ झुकती हैं तो शरीफ व्यक्ति की नाक कटती है तो पुलिस वालों का मनोबल बोतल से निकले जिन्न की तरह बढने लगता है....हा...हा..
हर इंसान के चेहरे पर नाक होती है। शरीफ और पढे लिखे लोग इस नाक को अपनी इज्जत बताते हैं। वैसे जानवरों की भी नाक होती है, लेकिन जानवरों की नाक इंसानी नाक की तरह जब तब कटती नहीं रहती है। यह शोध का विषय हो सकता है कि इंसान को अपनी नाक कटने से अधिक पीड़ा होती है या जेब कटने से? इंसान की जेब और नाक में किस तरह का संबंध है?
इंसान की 'अनकवर्ड ' नाक उसकी प्रतिष्ठा का प्रतीक कब और कैसे बन गई यह भी शोध का विषय हो सकता है। शरीर के किसी अंग पर हमला हो या किसी का चारित्रिक पतन हो जाय लेकिन बोलचाल की भाषा में इसे प्रतिष्ठित व्यक्ति की नाक कटना ही कहा जाता है। यहां तक कि लोग घृणा मिश्रित स्वर में कहने लगते हैं , देखो उसने अपनी नाक कटा डाली।
कहने को तो यह कहा जा सकता है कि इंसान क्या जनवरों के पास तक नाक होती है। लेकिन अपने देश में राजनीतिक नाम का एक प्राणी होता है, जिसके पास नाक नहीं होती। क्या अपने कभी सुना है कि किसी नेता की नाक कट गयी? नाक तो उसी की कट सकती है जिसकी जेब भी कट सकती हो। जेब काटने वालों की नाक भला कैसे कटेगी? लेकिन आप माने या न माने , पुलिस वालों के पास भी नाक होती है, जो इंसान और जानवरों की नाक से भिन्न होती है। एक फर्क यह भी है कि पुलिस वालों की नाक जब तब कटती नहीं रहती और उनकी जेब तो खैर कभी कटती ही नहीं। या इसे यूं भी कहा जा सकता है कि उनकी नाक कट ही नहीं सकती क्योंकि उनकी नाक स्थूल नहीं होती है। इंसान की नाक टेलीविजन का वह मानीटर है जिस पर तन और मन में हो रहे परिवर्तनों को देखा जा सकता है। टेलीविजन पर दक्षिणी अफ्रीका और जिम्बाब्वे के साथ हो रहे क्रिकेट मैच के उतार -चढाव को देखकर उत्साही लोग कह रहे थे कि फलां टीम ने अपनी नाक कटा दी या फला टीम ने अपने देश की नाक ऊंची कर दी। पुलिस वालों की नाक मेन्होल का ढक्कन होती है जिसको ऊपर से देखकर भीतर बहने वाले पदार्थ का अंदाज लगाने में गङबङी हो सकती है।
नाक के नीचे आम तौर पर मूंछे पाई जाती हैं। अगर मूंछे नहीं है तो नाक के नीचे सीधे उदरस्थ करने वाला मुंह मिलेगा। मूंछे बङी खतरनाक चीज होती हैं। जिसकी जितनी बङी मूंछे होंगी उसे फर्स्ट साइट में उतना ही खतरनाक मान लिया जाता है, भले ही वह चूहा देखकर रजाई में घुस जाय। बिना मूंछ वाले किसी व्यक्ति के सामने बैठकर कोई मूंछवाला अगर नाहक ही अपनी मूंछो को ऎंठने लगे तो साहब बिना चाकू तमंचे के ही दंगा हो जायेग। सामने वाले की आंखो में अपनी आंखे डालकर अपनी मूंछो पर उंगलियां फेरना बिना घोषणा के युद्व का ऎलान है। अगर मूंछो पर उंगलियां फेरने वाला साथ में मुस्कुराता भी जा रहा हो तो यह मुस्कुराहट सीज फायर नहीं बल्कि आग मॆं घी डालने का काम करेगी। मेरे एक मित्र कहते हैं कि मूंछो पर उंगलियां फ्राते हुये मुस्कुराना वैसा ही है जैसे किसी देश पर कब्जा करने के बाद वहां के लाल किले जैसी इमारत पर झंडा रोहण करना।
मूंछ नाक और मनोबल का आपस में क्या संबंध है? किस अदृश्य नाजुक डोर से ये बंधे हैं, यह समझना टेढी खीर है। तीनों में दोस्ती या दुश्मनी का कोई रिश्ता जरूर है। संभवतः ये इंटरनेट जैसी किसी प्रणाली से जुङे हों जिसकी खोज करना अभी बाकी हो। लेकिन ऎसा क्यों होता हैकि पुलिस वालों की बङी-बङी मूंछे देखकर बिना मूंछो वालों का मनोबक तत्काल गिर जाता है। जैसे जेठ की दोपहरी में अचानक ओला गिरने से तापमान गिर जाता है। इसी तरह से शरीफ लोगों की नाक ऊंची होते देख पुलिस वालों का मनोबल पहाङ के शीर्ष से लुढकते पत्थर की तरह गिरने लगता है। जब किसी पुलिस वाले की मूंछे नीचे की तरफ झुकती हैं तो शरीफ व्यक्ति की नाक कटती है तो पुलिस वालों का मनोबल बोतल से निकले जिन्न की तरह बढने लगता है....हा...हा..