Iwaan Rojoski
31st May 2011, 03:21 PM
प्रसंग है कि एक छात्र परीक्षा के पहले भगवान से प्रार्थना कर रहा है.....
हे प्रभो..इस दास की इतनी विनय सुन लीजिए..
इस बार मेरी नाव को उस पार बस कर दीजिए...
मैं नहीं डरता प्रलय से मौत या तूफ़ान से..
कांपती है रूह पर मेरी सदा इम्तिहान से...
भूगोल में गत वर्ष आया गोल है कैसे धरा.?
और मैंने एक पल में लिख दिया उत्तर खरा...
गोल है पूरी कचौड़ी, गोल गप्पा गोल है....
गोल रसगुल्ला जलेबी गोल लड्डू गोल है...
गोल लड्डू गोल है मुहं भी हमारा गोल है...
इसीलिये हे मास्टर जी यह धरा भी गोल है..
झूम उठे मास्टर जी इस अनोखे ज्ञान से..
और पर्चे पर उन्होंने लिख दिया यह शान से...
ठीक है बेटा हमारी लेखिनी भी गोल है ..
गोल है दावात ,नंबर भी तुम्हारा गोल है....
गणित का सवाल था या जी का जंजाल था...
प्रश्न पढते ही सब छात्रों का बुरा हाल था....
डेढ़ बिल्ली डेढ़ चूहे डेढ़ दिन में खाती है...
तो पांच बिल्ली पांच चूहे कितने दिन में खायेगी..?
हे भगवन..मैं उस दिन को अभी तक कोस रहा हूँ....
उस आधी बिल्ली को आज तक खोज रहा हूँ....
उत्तर तो दूर की बात रही.. भगवान..!!
फेल होने का नतीजा आज तक भोग रहा हूँ....
हे प्रभो..इस दास की इतनी विनय सुन लीजिए..
इस बार मेरी नाव को उस पार बस कर दीजिए...
मैं नहीं डरता प्रलय से मौत या तूफ़ान से..
कांपती है रूह पर मेरी सदा इम्तिहान से...
भूगोल में गत वर्ष आया गोल है कैसे धरा.?
और मैंने एक पल में लिख दिया उत्तर खरा...
गोल है पूरी कचौड़ी, गोल गप्पा गोल है....
गोल रसगुल्ला जलेबी गोल लड्डू गोल है...
गोल लड्डू गोल है मुहं भी हमारा गोल है...
इसीलिये हे मास्टर जी यह धरा भी गोल है..
झूम उठे मास्टर जी इस अनोखे ज्ञान से..
और पर्चे पर उन्होंने लिख दिया यह शान से...
ठीक है बेटा हमारी लेखिनी भी गोल है ..
गोल है दावात ,नंबर भी तुम्हारा गोल है....
गणित का सवाल था या जी का जंजाल था...
प्रश्न पढते ही सब छात्रों का बुरा हाल था....
डेढ़ बिल्ली डेढ़ चूहे डेढ़ दिन में खाती है...
तो पांच बिल्ली पांच चूहे कितने दिन में खायेगी..?
हे भगवन..मैं उस दिन को अभी तक कोस रहा हूँ....
उस आधी बिल्ली को आज तक खोज रहा हूँ....
उत्तर तो दूर की बात रही.. भगवान..!!
फेल होने का नतीजा आज तक भोग रहा हूँ....