captain
25th April 2006, 10:39 PM
कतरा ही इक मिल जातापानी की जो कद्र तू करता,
मानव तू भी खिल जाता।
जी लेता मैं और ज़रा सा,
कतरा ही इक मिल जाता।
मानव तू भी खिल जाता।
जी लेता मैं और ज़रा सा,
कतरा ही इक मिल जाता।
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