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View Full Version : देसी से ज्यादा विदेशियों ने लिया संन्यास


Badshah
16th February 2010, 03:19 PM
हरिद्वार। संन्यास का महत्व अब विदेशियों को भी समझ में आने लगा है। सादा जीवन जीने का प्रण लेने वालों के मामले में वे भारतीयों से भी आगे निकल रहे हैं। अगर आपको इस बात पर यकीन ना हो तो हरिद्वार आकर देख लीजिए। सोमवार को नील धारा में चले रहे शिविर में जहां भारत के मात्र सात लोगों ने संन्यास का चोला पहना, वहीं रूस, जापान, यूक्रेन और जार्जिया के 58 नागरिकों ने संन्यासी जीवन में पदार्पण किया।
वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठान के साथ जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर पायलट बाबा के सानिध्य में पांच पंडितों ने इन सभी को संन्यास जीवन की दीक्षा दिलाई। महाकुंभ की शेष अवधि में इन्हें संन्यासी जीवन की विशेषताओं से अवगत करा दिया जाएगा।
इसके बाद ये संन्यासी देश दुनिया में धर्म प्रचार करेंगे। इस दौरान महंत रंगनाथ ने संबंधित भाषाओं में अनुवाद करते हुए विदेशियों को संन्यासी जीवन के संबंध में जानकारी दी। शिविर में अलग-अलग समूहों में इन्हें संन्यास की दीक्षा दी गई।
रविवार को शिविर में इस आयोजन के लिए तैयारियां शुरू हो गई थीं। संन्यासी जीवन में पदार्पण करने वाले ये सभी पांच साल से जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर पायलट बाबा से जुडे़ हुए हैं। इस मौके पर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर पायलट बाबा ने कहा कि संन्यासी जीवन पूरी तरह से अध्यात्म के लिए समर्पित होता है। सांसारिक सुखों से इनका कोई वास्ता नहीं होता है। इनका उद्देश्य भी समाज कल्याण ही होता है। महंत पायलेट बाबा ने कहा कि समूचा विश्व अध्यात्म के महात्म्य को बखूबी जानता है। उन्होंने कहा कि आज संन्यास लेने वालों को कुंभ काल तक संन्यासी जीवन की हर विधा में पारंगत कर दिया जाएगा।
इसके बाद ये देश दुनिया में जाकर धर्म रक्षा के लिए कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि इसी तरह का एक और शिविर मार्च में भी आयोजित किया जाएगा।