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View Full Version : बशीर बद्र के अ`शआर


dengu
15th July 2009, 05:42 PM
मुहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला,
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला।


घरों पे नाम थे, नामों के साथ ओहदे थे,
बहुत तलाश किया, कोई आदमी न मिला।


तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड़ आया था,
फिर उसके बाद मुझे कोई अजनबी न मिला।


ख़ुला की इतनी बड़ी क़ायनात में मैंने,
बस एक शख़्स को मांगा, मुझे वही न मिला।


बहुत अजीब है ये क़ुरबतों की दूरी भी,
वो मेरे साथ रहा और मुझे कभी न मिला।

alibaba
15th July 2009, 05:46 PM
Wah Wah Wah Wah :adore::adore:

Jupiter
15th July 2009, 06:04 PM
Deja vu.......

Dengu bhai kya ho gaya hai... repeats ka ambaar laga diya aapne