alibaba
28th February 2009, 05:26 PM
हमने आज कुछ पुरानी रचनाओं मे से एक रचना पढी, जिसे हमारे fz के परम सम्मानीय श्री बिल्लो पहलवान जी के परम ग्यानी शिश्य श्री लम्पट् श्रेश्ठ जी ने लिखा है. हम उसमे कुछ और जोडते हुए, उसे आप सभी के सम्मुख पुनह् प्रस्तुत कर रहे है. हमे आशा ही नही बल्कि पूर्ण विश्वास है कि आप समस्त फण्डूजन इसे पसन्द करेगें:
एक बार प्रेम से बोलो श्री मच्छर जी महाराज की जै
॥ॐ॥ अथ् श्री मच्छर चालीसा ॥ॐ॥
॥दोहा॥ मच्छर महिमा अति प्रबल, कहहि सुनहि जो लोग
तिनहि न मच्छर कटहि, भागें सारे रोग ॥दोहा॥
जै मच्छर भगवान उजागर, गुन अगनित कष्टों के सागर
ऱोग् द्त अतुलित बलधामा, ऱक्त् चूस खटमल के मामा ||1||
सूष्म रूप धरि नित आ जाते, भीम रूप धरि के खा जाते
मधुर मधुर खुजलाहट लाते, सबकी देह लाल कर जाते ||2||
कोई जगह न ऐसी छोडी, जहां न रिश्तेदारी जोडी
व्याप रही जग तुम्हरी माया, बल अद्भुत यदपि कस काया ||3||
समदरसी तुम चतुर सयाने, नीच उँच कभी ना जाने
बालक वृद्ध् युवा नर नारी, सब पर निज़ माया विस्तारी ||4||
कर्ण समीप आकर मन्डराते, मधुर मन्द सन्गीत सुनाते
तन मे कोमल डन्क् गडाते, रक्त पान कर के उड जाते ||5||
कछुआ छाप जो नित्य जलाते, वे नर कहु जा निद्रा पाते
गुड नाईट से तुम भय खाते, जाने किस बिल मे घुस जाते ||6||
॥दोहा॥ निशि वासर संकट हरण, मिलन यहाँ अति क्रूर,
अपने दल बल के सहित, बसो हिन्द से दूर ॥दोहा॥
॥ॐ॥ इति श्री मच्छर चालीसा ॥ॐ॥
एक बार प्रेम से बोलो श्री मच्छर जी महाराज की जै
एक बार प्रेम से बोलो श्री मच्छर जी महाराज की जै
॥ॐ॥ अथ् श्री मच्छर चालीसा ॥ॐ॥
॥दोहा॥ मच्छर महिमा अति प्रबल, कहहि सुनहि जो लोग
तिनहि न मच्छर कटहि, भागें सारे रोग ॥दोहा॥
जै मच्छर भगवान उजागर, गुन अगनित कष्टों के सागर
ऱोग् द्त अतुलित बलधामा, ऱक्त् चूस खटमल के मामा ||1||
सूष्म रूप धरि नित आ जाते, भीम रूप धरि के खा जाते
मधुर मधुर खुजलाहट लाते, सबकी देह लाल कर जाते ||2||
कोई जगह न ऐसी छोडी, जहां न रिश्तेदारी जोडी
व्याप रही जग तुम्हरी माया, बल अद्भुत यदपि कस काया ||3||
समदरसी तुम चतुर सयाने, नीच उँच कभी ना जाने
बालक वृद्ध् युवा नर नारी, सब पर निज़ माया विस्तारी ||4||
कर्ण समीप आकर मन्डराते, मधुर मन्द सन्गीत सुनाते
तन मे कोमल डन्क् गडाते, रक्त पान कर के उड जाते ||5||
कछुआ छाप जो नित्य जलाते, वे नर कहु जा निद्रा पाते
गुड नाईट से तुम भय खाते, जाने किस बिल मे घुस जाते ||6||
॥दोहा॥ निशि वासर संकट हरण, मिलन यहाँ अति क्रूर,
अपने दल बल के सहित, बसो हिन्द से दूर ॥दोहा॥
॥ॐ॥ इति श्री मच्छर चालीसा ॥ॐ॥
एक बार प्रेम से बोलो श्री मच्छर जी महाराज की जै