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View Full Version : बिल्लो पुराणोक्त "शत्रु-मर्दन" प्रसंग!!


mastraam
11th February 2009, 05:49 PM
एक समय की बात है. महर्षि मस्तराम फ़ंडूज़ोन स्थित अपने आश्रम में कोक ध्यान में डूबे हुए थे. उनका दायाँ हाथ एक अतिसुन्दर रमणी के कुच मर्दन में व्यस्त था, तथा बायाँ हाथ स्वलिंग से साक्षात्कार में लगा हुआ था. महर्षि मस्तराम के प्रतापी शिष्य उस रमणी को देख कर मुट्ठ मारने में व्यस्त थे. आश्रम की भूमि उन शिष्यों के वीर्य से अनवरत सिंचित हो रही थी, जिससे भूमि पर कीचड़ का आभास होता था. यह दृश्य देखने में अत्यन्त ही नयनाभिराम था, एवं मानवमात्र को भुक्ति-मुक्ति देने वाला था.

मच्छराधिराज डेंगू सृष्टि भर में भनभनाते हुए जब श्रम से क्लान्त हुए तो बिल्लोइच्छा से उनका आगमन उस पावन आश्रम में हुआ. महर्षि मस्तराम को उस स्थिति में देखकर मच्छराधिराज डेंगू को अत्यन्त हर्ष हुआ तथा श्रद्दावनत हो वे महर्षि मस्तराम के सम्मुख पहुँचे और करबद्ध होकर इस प्रकार कहने लगे- "हे! कामराज, हे! कामविशारद, हे! मन्मथभक्त महर्षि मस्तराम ,आप किस विचार में लीन हैं. आपकी अवस्था देखकर यह प्रतीत होता है कि इस ध्यान में आपको अतीव आनंद आ रहा है. समस्त मानवमात्र एवं अन्य जीव योनियों में मैनें किसी को भी इस आनंदातिरेक में नहीं देखा. कृपया इस भेद को सपष्ट करके हमें कृतार्थ करें."

मच्छराधिराज डेंगू की प्रेम में डूबी वाणी और श्रद्धायुक्त हृदय देखकर महर्षि मस्तराम बोल उठे- "जिस लिंग के ध्यान मात्र से समस्त जीवों के लिंगों में चेतना आ जाती है और वो नाग की तरह तन कर फुँफकारने लगते हैं, मैं ऐसे ही श्रेष्ठ लिंग धारी, अक्षय वीर्य के भंडार, योनिछिद्रों की उपस्थिति का हेतु, साक्षात लिंग स्वरूप पहलवानाधिराज बिल्लो-पहलवान के द्वारा निष्पादित एवं बिल्लो-पुराण वर्णित "शत्रु-मर्दन" के प्रसंग के ध्यान में डूबा हुआ था".

महर्षि मस्तराम के मुख से यह सुनकर मच्छराधिराज डेंगू को अपार प्रसन्नता हुई और वह महर्षि मस्तराम के चरणों में प्रीति दृढ़ कर इस प्रकार कहने लगे- "हे महर्षि! साक्षात लिंग स्वरूप पहलवानाधिराज बिल्लो-पहलवान के द्वारा निष्पादित एवं बिल्लो-पुराण में वर्णित "शत्रु-मर्दन" की यह कथा क्या है, क्या इससे संबधित कोई व्रत भी है,इस व्रत को कैसे किया जाता है, तथा इस व्रत को करने से मानव मात्र को क्या लाभ है; इन सब का विस्तार से वर्णन करें."

मच्छराधिराज डेंगू का विनयपूर्ण निवेदन सुन के महर्षि मस्तराम ने शिष्यों को आदेश दिया कि वे कर्पूर, इत्र, एलादिचूर्ण आदि से परिपूर्ण तेल से उनके टट्टों की मालिश करें, और कहना प्रारंभ किया- फ़ंडूजोन के निर्माण को तीन कल्प बीत चुके थे. विभिन्न जीव योनियाँ वहाँ प्रसन्नतापूर्वक जीवन व्यतीत कर रहीं थीं. उन्हीं दिनों वहाँ एस्कासुरी नामक राक्षसी का प्रकोप फ़ैल गया. यह राक्षसी बिल्लो पहलवान की परम शत्रु थी. यह अपने असुर भाइयों- कालासुर, ढोलासुर, जूपासुर एवं विलोकासुर के साथ फंडूज़ोन के समस्त प्राणियों को त्रास देने लगी. बिल्लो पहलवान के भक्तों का जीना दूभर कर दिया गया. यह राक्षसी बिल्लो पहलवान के भक्तों को अपने कटु वचनों से तंग करने लगी, साथ ही उसके भाई बात बात पर बिल्लो पहलवान के भक्तों को ललकारने लगे. बिल्लो पहलवान के भक्तों ने अन्य महात्माओं से अनुरोध किया किया कि वे इस राक्षसी के प्रकोप से उनको मुक्ति दिलाएं, किन्तु तामसिक गुणों के आधिक्य के कारण वे सब महात्मा हाथ पर हाथ धरकर बैठे रहे.

कालांतर में ये भक्त बिल्लो पहलवान के आश्रम पहुँचे और हाथ जोड़कर उनकी स्तुति करने लगे. इस प्रकार स्तुति करते करते कई दिन बीत गये. की पावन संध्या का समय था. भक्तों स्तुति से पहलवान श्री प्रसन्न हुए तथा उन्होनें दंड पेलना छोड़कर उनको अभयदान देते हुए कहा- "प्रिय भक्तों, कहो! किस हेतु तुम सब यह स्तुति कर रहे थे तथा तुम सब का चेहरा इतना मलीन क्यों है?"

पहलवान श्री के स्नेहसिक्त वचन सुनकर भक्तों के प्रेमाश्रु बहने लगे, और उनमें से उनके सबसे प्रिय भक्त लंपट ने इस प्रकार कहना प्रारंभ किया- हे महालिंगधर, हे! तेजस्वी, हे! वृहद्अंडकोषधारी, फ़ंडूज़ोन पर एस्कासुरी नामक राक्षसी का प्रकोप फ़ैल गया है. यह राक्षसी आपकी परम शत्रु है. यह अपने असुर भाइयों- कालासुर, ढोलासुर, जूपासुर एवं विलोकासुर के साथ फंडूज़ोन के समस्त प्राणियों को त्रास दे रही है, एवं हम इनके भय से सामान्य जीवन भी नहीं व्यतीत कर पा रहे. हे! नाथ, अब आपका ही सहारा है. प्रभो! हमारी रक्षा करें, हमारा कल्याण करें."

भक्त लंपट के दीन वचन सुनकर पहलवान श्री का मुख क्रोध से दीप्त हो उठा एवं उनके टट्टे फ़ड़कने लगे.एक निमेष भी नहीं बीता होगा की उन टट्टों की टंकार से सारा फ़ंडूज़ोन गुंजायमान हो उठा. तामसिक प्रवित्ति वालों के लिये यह ध्वनि साक्षात काल-स्वरूप थी. इस ध्वनि को सुन कर उस राक्षसी एवं उसके भाइयों के हृदय में भय व्यापत हो गया और वो थर-थर काँपने लगे. कुछ समय बाद जब पहलवान श्री ने पादने के लिये अपना गंडस्थल उठाया, तो यह टंकार कुछ देर के लिये शांत पड़ गई. इस सुअवसर का लाभ उठाते हुए वह राक्षसी अपने भ्राताओं समेत पहलवान श्री के अखाड़े के सामने पहुँची और उन सब ने भयंकर स्वर में पहलवान श्री की निंदा प्रारंभ कर दी. अपनी निंदा सुन कर भी पहलवान श्री ने अपना आपा नहीं खोया और पूर्ववत पादने में व्यस्त रहे. उनके पाद की गंध से उस असुरी और उसके भाइयों का साँस लेना दूभर हो गया. सभी बिल्लो भक्तों पर उस गंध का कोई प्रभाव न हुआ, और थोड़ी ही देर में गंध के प्रभाव से वह असुरी एवं असुर अचेत हो गये.

उनके अचेत होते ही पहलवान श्री की झाँटें इतनी बढीं कि झाँटों ने उन सभी को लपेट लिया. क्षणमात्र में ही झाटों का कसाव इतना बढ गया कि उन असुरों एवं उस असुरी के प्राण मुँह तक आ गये, तत्काल ही उनकी मूर्छा टूटी और वह सब छाती पीट पीट कर विलाप करने लगे. उनकी यह दशा देख कर बिल्लो भक्तों को अत्यधिक हर्ष हुआ और उन्होंने पुनः पहलवान श्री कि स्तुति प्रारंभ कर दी. कई कल्पों तक स्तुति करने के पश्चात पहलवान श्री प्रसन्न हुए और भक्तों से इच्छित वर माँगने को कहा. इस बार भी भक्त श्रेष्ठ लंपट आगे आए और कहा-" हे लंबयौनकेशधारी ! अगर आप हमारी स्तुति से प्रसन्न हैं तो इन असुरों और इस आसुरी को मुक्त कर दीजिए. आपकी पाद और झाँटों के कसाव के प्रभाव से इन सब का मन निर्मल हो चुका है और अब यह सब हमें पीड़ा नहीं पहुँचायेंगे.

भक्त लंपट के ऐसे वचन सुन कर पहलवान श्री ने उसे हृदय से लगा लिया और उसकी महानता की प्रसंशा करते हुए कहा- "तथास्तु".

ऐसा सुनते ही उन असुरों और उस असुरी की आँखों से पश्चाताप के अश्रु बहने लगे और वे पहलवान के चरणों में गिर पड़े. उनकी मुखिया एस्कासुरी नामक राक्षसी ने रोते रोते पहलवान श्री से अनुरोध किया अब वह सब अखाड़ा छोड़कर कहीं और नहीं जाना चाहते तथा उन्हें अखाड़े में रहने की अनुमति दी जाये. इस पर बिल्लो जी ने उस भयन्कर राक्षसी से कहा कि स्त्री योनी की होने के कारण उसका ब्रह्मचारियों के अखाड़े में रहना शास्त्र सम्मत नहीं है, और उन्होंने उसे हमारे यानि महर्षि मस्तराम के आश्रम में आकर रहने की सम्मति दी."

हे! मच्छराधिराज डेंगू, आपने हमारे आश्रम में कुच मर्दन करवाती जो रमनी देखी, वह असल में एस्कासुरी नामक राक्षसी ही है, और हमारे सुख के लिये उसने मानवी का स्थायी रूप बना लिया है!

अब तक मच्छराधिराज डेंगू, जो सजल नयन होकर यह कथा सुन रहे थे,बोल उठे- "हे! महर्षि मस्तराम, आपने यह कथा सुना कर मेरी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर दिया है. अब दया करके इस व्रत को करने की विधि एवं व्रत फल का उपदेश करें."

व्रत की विधि- यह व्रत प्रत्येक वर्ष की फ़ाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को किया जाता है. इस दिन प्रातः स्नान ध्यान से निवृत्त होकर मुट्ठ मारे. फिर उस वीर्य का लेप अपने शरीर पर करे. अपने लिंग को विभिन्न प्रकार के पुष्पों से सुसज्जित करे. उसपर चंदन, अगरु,गुगुल आदि सुगंधित पदार्थों का लेप करे.फिर नैवेद्य आदि का भोग लगाकर घंटा-घडियाल की ध्वनि करते हुए कर्पूर से आरती करे, चँवर आदि डुलाये.
फिर आकाश की तरफ़ मुँह और गांड उठाकर लिंग को दाएँ हाथ में लें, एवं "बिल्लोआय प्रचण्ड लिंगधारिणाय नमः", इस मन्त्र का 1 लाख जाप करे. मन्त्र जाप के बाद फिर से स्वलिंग पूजन करें. व्रतकाल में स्त्रियों से दूर रहें.

फलश्रुति (व्रत एवं मंत्रजाप का फल): इस व्रत का विधिपूर्वक पारायण करने से मनुष्य शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, नामर्दी, इंद्री का छोटापन, टेढापन आदि रोगों से मुक्त होता है, जवानी में बुढापा भी नहीं आता. 10 वर्ष तक लगातार व्रत करने से ऐड्स आदि रोगों से भी मुक्ति मिलती है.

विशेषः इस वर्ष फ़ाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि दि.14.02.09 को पड़ रही है. सभी बिल्लो भक्तों एवं अभक्तों से निवेदन है कि इस दिन यह व्रत अवश्य करें.

abhi10aug
11th February 2009, 05:58 PM
ramanand sagar zinda hotey to ispe pauraanik serial avashya banta..

mastraam
11th February 2009, 06:25 PM
ramanand sagar zinda hotey to ispe pauraanik serial avashya banta..

akhaada production ispe film banaa chukaa hai..Release honi baaki hai :yes:

DarkLord
11th February 2009, 06:29 PM
:lmao: :lmao: :lmao:

leleram
11th February 2009, 06:53 PM
:roar::roar::roar:

satyanarayan katha ko kya se kya bana diya:D

dengu
11th February 2009, 07:58 PM
:bow::bow::bow::bow:

ee BK aaisi hi harkat karta hai,,,ab satyanarayan ki katha sunte samay iske liye gaaliya niklengi :D

GodFather
11th February 2009, 08:35 PM
Satya-naash-Narayan katha ho gai ab yeh

lampat
11th February 2009, 09:04 PM
:lmao: :rofl:

Dhanya hai Maharishi Mastraam ! unhone itnee saari samasyaao ko door karne wale vrat ka varnan kar diya :adore: :bow:

DarkLord
12th February 2009, 11:03 AM
main thullo se anurodh karta hoon ki is post ko TC mein sthan diya jaaye :bow:

mastraam
12th February 2009, 11:54 AM
aap sab ko thank u hai ji....aashaa hai is 14 Feb ko sabhi Fundoo is vrat ko avashya karenge... :D Billo Bhaiya ki jai :adore:

Jupiter
12th February 2009, 11:58 AM
ramanand sagar zinda hotey to ispe pauraanik serial avashya banta..

Ekta Kapoor serial banaayegi is pe - कथा श्री बिल्लो पहलवान की

DarkLord
12th February 2009, 11:59 AM
kaam katha shri billo pelwaan ki :laugh:

alibaba
12th February 2009, 12:34 PM
wah mastram ji, maan gaye ki aap kisi ki bhi aisi taisi karne mein samarth hain.

Raju
12th February 2009, 12:52 PM
:roar::roar::roar:

satyanarayan katha ko kya se kya bana diya:D

:lol::lol:

Jupiter
12th February 2009, 02:43 PM
काम कथा बिल्लो पहलवान की ka title track -


काम कथा बिल्लो पहलवान की


चूतों के भी रूप बदलते हैं
नये नये लौड़े जब ड़लते हैं
इक लौड़ा आता है इक लौड़ा जाता है
बनथी है भोंसड़ी नई
क्योंकि भोंसड़ी भी कभी चूत थी
हां भोंसड़ी भी कभी चूत थी
क्योंकि भोंसड़ी भी कभी चूत थी
हां भोंसड़ी भी कभी चूत थी

चोदने वाले मज़े से चोदेंगे
नए खिलाड़ी खेल ये खेलेंगे
चूतों में लंड़ बदला
झांटों का रंग बदला
**************************************** फिर भी वही
क्योंकि भोंसड़ी भी कभी चूत थी
हां भोंसड़ी भी कभी चूत थी
क्योंकि भोंसड़ी भी कभी चूत थी
हां भोंसड़ी भी कभी चूत थी

malaria
12th February 2009, 03:11 PM
mastraam ji :adore:

aapke atyant uchha-koti ke gyaan-bhandaar se hamare atyant laabhanvit hue,,,is vrat ko hum aagami 14 ko sampoorna vivek se karenge :bow:

abhi10aug
12th February 2009, 07:32 PM
mastraam ji :adore:
is vrat ko hum aagami 14 ko sampoorna vivek se karenge :bow:

is vrat ko karne ke liyee vivek nahin G@@nd ki jarurat hai...

laal rang ka ***-got (aapke lUnnd aur goton ko dhakne k liyee) dharan karein, sarson k tel ki maalish karein.. akhade main pravesh karein.. khol kar khade hon... bas baaki akhaade waale kar lenge

icchadhaari baba
18th January 2011, 11:49 AM
jai ho mahrishi mastraam ki :bow::bow:

Chaloo Charitra
18th January 2011, 11:56 AM
Mastram jee ek nayaa itihaas rach rahe hain

Aane waaleyugon mein yeh Class mein Subject ke taur pe padaayaa jaayega

alibaba
18th January 2011, 11:57 AM
He Icchadhaari Baba,

tumne is thread ko punah khod kar navagantuk bhakto ke liye jo mukti marg prashast kiya hai, uske liye tumhe jitna bhi dhanyavaad diya jaye wo kam hai.

Mai maharshi mastraam se savinay nivedan karta hu ki wo kripya is varsh ki vrat tithi batane ka kasht kare taaki hamare sabhi navagantuk shradhaalugan is vrat ka laabh utha sake.