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View Full Version : Fcuk you RAJ THACKREY


vrfrendz
2nd December 2008, 05:07 PM
North East South or West...... Indians are Indians and will always be Indians......

"जब ताज होटल के कमरों में घुसकर हम वहाँ फंसे लोगों को विश्वास दिलाते थे कि अब वो सुरक्षित हैं तो उनकी आंखों में हमारी छवि किसी भगवान से कम नहीं नज़र आती थी. ये गर्व के क्षण थे, इन्हें कभी भुला नहीं सकते हम..."
यह कहना है एक दुबली-पतली पर पैनी और तेज़ी भरी काया के 29 वर्षीय राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के कमांडो सुनील कुमार यादव का.

सुनील कुमार यादव एनएसजी के कमांडो हैं. उन्हें ताज में चरमपंथियों से मुठभेड़ के दौरान तीन गोलियाँ लगी थीं. लेकिन मुंबई के बाम्बे अस्पताल में भर्ती सुनील की आंखों में दर्द की एक लकीर तक नहीं है.

सुनील ताज होटल के ऑपरेशन में शामिल थे. उन्हीं के शब्दों में कार्रवाई कुछ इस तरह हुई:

हम आदेश मिलते ही रात को दिल्ली से रवाना हुए. मुंबई हवाई अड्डे से सीधे सचिवालय के पास पहुँचे और फिर टीम बना दी गईं. इसके बाद 27 तारीख सुबह ताज में सबसे पहले अंदर जाने वाले कमांडो दस्ते में मैं था.

हमने छठी मंज़िल से अपना काम शुरू किया. वहाँ से लोगों को निकालते और चरमपंथियों से मोर्चा लेते हुए हम नीचे की तरफ़ आ रहे थे.

तीसरी मंज़िल तक पहुंचने में रात होने लगी थी. हम लोग रात के चश्मों के सहारे सब कुछ देख पा रहे थे. पूरी इमारत में घुंआ भरा हुआ था.

एक-एक कमरे की तलाशी का काम चल रहा था. कमरों के अंदर फंसे लोग घबराए हुए थे कि बाहर कहीं चरमपंथी न हों. हम लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण यह था कि कहीं चरमपंथी भी लोगों को बंधक बनाकर कमरे में मौजूद न हों. लोग पुलिस-पुलिस की आवाज़ पर भी कमरे नहीं खोल रहे थे.

इस दौरान हमारा साथ दे रहे थे होटल के कुछ कर्मचारी. विदेशी भाषाओं में बात करके वे फंसे हुए लोगों को समझा रहे थे, ताले खोलने में हमारी मदद कर रहे थे.

भय और भगवान

"हम जैसे ही कमरों में जबरन दाख़िल होते थे, लोग डर के मारे सांसें रोककर खड़े हो जाते थे. जैसे ही उन्हें समझ आता था कि हम उन्हें बचाने आए हैं, वे रोने लगते थे, बदहवास हो जाते थे, हमसे गले मिलने लगते थे.

मैंने इन लोगों की आंखों में अपने प्रति एक भगवान के आ जाने जैसा भाव देखा है. यही बात हमें ताकत दे रही थी. इस ऑपरेशन की यह सबसे पहली याद रहेगी मेरे ज़हन में.


चरमपंथियों से मोर्चा लेते हुए जब मैं ताज की तीसरी मंज़िल पर पहुँचा तो वहाँ किसी तरह से एक कमरे में खुद को छिपाकर बैठी एक अधेड़ उम्र की विदेशी महिला को बाहर निकाला.

इस महिला को कवर करता हुआ मैं अगले कमरे की ओर बढ़ा. दरवाज़ा खोलते ही गोलियों की तड़तड़ाहट हुई. कमरे में एक चरमपंथी घात लगाए बैठा था. होटल कर्मचारी घायल हो गया.

मैंने जवाबी गोलीबारी की पर अब मेरे लिए पहले इन दोनों लोगों की जान बचाना ज़्यादा बड़ी प्राथमिकता थी.

अब तक दरवाज़ा बंद हो गया था पर गोलियाँ दरवाज़े के पार आ रही थीं. मैंने दोनों लोगों को खींचकर गोलियों के दायरे से बाहर किया. अब तक तीन गोलियाँ मेरे पीछे धंस चुकी थीं."

हौसला

इसके बाद सुनील अस्पताल भेज दिए गए जहाँ अब उनकी हालत स्थिर है.

एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले सुनील दो भाई और एक बहन हैं. दिल्ली से सटे गुड़गाँव के पटौदी गांव के रहनेवाले सुनील के पिता दिल्ली में एक बैंक में कैशियर हैं. सुनील की शादी हो चुकी है और तीन साल का बेटा कार्तिक भी है.

सुनील को नहीं मालूम कि उन्हें कब तक मुंबई में रहना पड़ेगा, कब वो ठीक होकर लौटेंगे पर सुनील ने परिवार के लोगों को यहाँ आने से मना कर दिया है.

सुनील बताते हैं, "हम घरवालों को बताकर नहीं चले थे. अभी भी उनसे बात तो हो गई है पर यहाँ आने पर उन्हें चोट का सच मालूम होगा तो और परेशान होंगे. जबतक देह पर ये वर्दी है, ऐसा तो होता ही रहेगा. फिर हर बात पर परिवार को भी तकलीफ़ क्यों दी जाए."

ताज के अंदर दर्दनाक मंज़र

सुनील की आंखों में ताज के अंदर का हाल बयान करते समय बर्बादी की छाया दिखाई देती है.

वे बताते हैं, "ताज को बुरी तरह जलाया गया था. कई जगहों पर आगज़नी की गई थी. कहीं-कहीं पर गोली, धमाकों की वजह से आग लग गई थी. काला धुंआ पूरे माहौल को और भयानक बना रहा था."

उनके अनुसार, "सबसे ज़्यादा रोंगटे खड़े करनेवाला मंज़र था किचन के पास का. ग्राउंड फ्लोर पर स्थित किचन के अधिकतर स्टाफ़ को चरमपंथियों ने मार दिया था. सीढ़ियों का रास्ता रोकने के लिए 15-20 शवों को एक सीढ़ी-एक शव के हिसाब से बिछा दिया गया था ताकि ऊपर न जाया जा सके. कुर्सियाँ, मेजें, ट्राली जगह जगह छोड़ दी गई थीं ताकि कोई आसानी से आ-जा न सके और अगर उन्हें हटाने की कोशिश करें तो आवाज़ होने से पता लग सके."

सुनील बताते हैं कि मिशन पर जाने से पहले फ़ोन, घर-परिवार, आगे-पीछे के सवाल, पहचान और बाकी तमाम बातें भूल जाते हैं. याद रहता है तो सिर्फ़ मिशन. राज ठाकरे के पिछले दिनों के बयान की बात छेड़ने पर वो मुस्कुरा देते हैं. काश उनका इशारा राज ठाकरे समझ पाते.

Taken from //http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2008/12/081202_nsg_commando_ri.shtml

Long live the patriotism of Indians :hi_5:

Sunshine
2nd December 2008, 06:27 PM
I watched his interview on T.V..... May God bless him ! We need more brave men like him in our country...sadly the generation next is more interested in the jobs that just pay them well. Thats the fact.

As far as Thackrey is concerned I am sure every one is wondering where is he.... got few SMS ---

Please forward Raj Thackeray’s number if you have it.

Want him to go and save aamchi Mumbai along

with his MNS goondas, the sons of the soil.

Army and NSG commandos are not Marathi manoos,

so why should they lay down their lives for Mumbaikars?

Jaago Mumbaikars!’



2) Where is Raj Thackeray and his `brave’ Sena?

Tell him that 200 NSG commandos form Delhi

(No marathi manoos, all south and north Indians)

have been sent to Mumbai to fight the terrorists

so that he can sleep peacefully.

Pls forward this so that it finally reaches the coward bully.’



3) “Custodians who stake claim to every square

centimetre of Maharashtra’s land

are happily letting others die

as they have vada pav and kanda pohe

in the comfort of their own homes.”



Apne aap ko sher bolne walle chuho ki tarah baithe hai.

The Saint
2nd December 2008, 09:34 PM
i can't see the thank tab, so thanking vrfriends here for this excellent post. :thumbup:

JUNGLEE RAJA
3rd December 2008, 01:11 PM
To Add to Sunshine's list of SMSs

"Worry not about the men who come by boats
Our forces can easily defeat them

Worry about those who come by votes...."

Mastikhor
3rd December 2008, 01:32 PM
To Add to Sunshine's list of SMSs

"Worry not about the men who come by boats
Our forces can easily defeat them

Worry about those who come by votes...."

:adore: :adore:

:thumbup:

dengu
3rd December 2008, 01:39 PM
मुंबई आतंकी हमले के बाद हमारे देश के बहादुर (?) नेताओं ने लकीर और छाती पीटना शुरू कर दिया है। हालांकि इस दौरान कुछ समझदारी वाले बयान भी आए हैं लेकिन ये नेताओं के नहीं हैं। नेताओं ने तो ऐसी बातें बोली हैं कि उन्हें सुनकर आपको और हमको अचानक लगने लगता है कि इन नेताओं को पकड़कर जूते मारो। खैर कुछ बयानों की बानगी देखिए.....
दोस्तों, आपको और हमें पता है कि मुंबई में राज ठाकरे नाम का एक पॉमेलियन कुत्ता रहता है। हालांकि उसने अपने आपको एलसेशियन साबित करने की बहुत कोशिश की लेकिन मुंबई में हुए आतंकी हमले में उसकी खाल का असली रंग उतरकर सामने आ गया और वो चार दिन तक अंडरग्राउण्ड रहा। चार दिन बाद वो बाहर निकला वो भी अपनी बीवी के साथ। चूँकी वो महिला है इसलिए उसकी बीवी शर्मिला के लिए मैं किसी अपशब्द का उपयोग नहीं करूँगा सिवाए इसके कि वो एक मूर्ख महिला है जो अमिताभ बच्चन को एसएमएस करके बता रही है कि मुंबई हमले में शहीद होने वाले पुलिस वाले मराठी थे। देख लीजिए....मसलन हेमन्त करकरे, विजय सालस्कर, चित्ते, शिंदे आदि। तो भाईसाहब इस एसएमएस की बात यूपी वाले बच्चन साहब ने अपने ब्लॉग में जाहिर कर दी। और अब देश के लोगों को पता चल गया कि राज ठाकरे ने शादी भी अपनी ही तरह की एक बेवकूफ महिला से की है जो उसे पक्का मरवाएगी। इस संदेश के बाद दोनों पति-पत्नी को गालियाँ पड़ रही हैं और उनकी मुंबई के मराठी मानुस भी उन्हें गालियाँ दे रहे हैं। वैसे मैंने एक वैबसाइट पर इस एसएमएस पर एक कमेन्ट पढ़ा कि....मुंबई के लिए मरने वाले भले ही मराठी थे लेकिन उसे बचाने वाले उत्तर भारतीय थे। खैर, छोड़िए उस गधे राज ठाकरे को...।
आरआर पाटिल, देशमुख, अच्युतदानंदन, नकवी सब अपने बोले पर गाली खा रहे हैं। कई नेता इस्तीफे दे चुके हैं, लेकिन इतने थोड़े से हमारा क्या होगा..?? तो दोस्तों, ये छाती पीट रहे हैं लेकिन इस दौरान कुछ अन्य महत्वपूर्ण बयान भी सामने आए हैं। मैं उस ओर आपका ध्यान दिलाना चाहता हूँ....तो नजर कीजिए जरा...।
-अपने नष्ट हो चुके होटल को देखकर ताज पैलेस होटल के मालिक रतन टाटा ने कहा कि हमें हमले की जो भी पूर्व सूचना मिली थी उस हिसाब से हमने सुरक्षा इंतजाम किए थे। होटल के गेट पर मेटल डिटेक्टर लगवाया था। पर्किंग पर चैकिंग शुरू करवाई थी, लेकिन क्या करें आतंकी गेट से नहीं किचन से अंदर आए और फिर हमने युद्ध लड़ने की तैयारी नहीं की थी। ये सरकार की नीतियों की कमजोरी है कि वो आम आदमी से भी ये अपेक्षा करती है कि वो अपने बूते पर आतंकियों का सामना कर लेगा। - अपने देश के महत्वपूर्ण नागरिकों (चूँकी यहूदी संख्या में बहुत कम हैं, पूरे विश्व में मात्र १ करोड़ १० लाख) के मारे जाने के बाद बौखलाए इसराइल ने भारत सरकार की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने आतंकरोधी कार्रवाई करने के लिए हमें वहाँ नहीं आने दिया। सबकुछ बहुत देरी से शुरू किया गया। हमारे महत्वपूर्ण नागरिक मारे गए। भारत को अपनी नीतियाँ बदलनी चाहिए।
दोस्तों, देखा आपने.....इन आलोचनाओं के बाद खबर लगी कि भारत समुद्र चौकसी बढ़ा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने कोस्ट गार्ड के लिए धन स्वीकृत किया हैं। इससे समुद्र की तैनाती के लिए आधुनिक स्पीडबोट्स लगाई जाएँगी। वाह, धन्य है हमारी सरकार....। इसमें तो इतने कम अक्ल लोग बैठे हुए हैं कि कोई पाँचवी कक्षा का बच्चा भी इनकी पेंट उतार ले जाए। अरे यार, जब आतंकियों ने संसद पर हमला किया तो वहाँ तैनाती बढ़ा दी जैसे फिर से वो संसद पर हमला कर देंगे। इस बार वो समुद्री रास्ते से आए हैं तो वहाँ भी तैनाती बढ़ा दी जैसे अगली बार फिर वो समुद्र से आएँगे। आतंकी इतने बेवकूफ नहीं......वो बार नई योजना का इस्तेमाल करते हैं। अगर कहीं कोई बम विस्फोट होता है तो देश के सभी शहरों में हाई अलर्ट लगा दिया जाता है जैसे तुरंत ही बाकी शहरों में भी बम विस्फोट हो जाएगा। भारत सरकार को आतंकवाद से निपटने के लिए समग्र योजना बनानी चाहिए....फौरी योजना नहीं। लेकिन दोस्तों, हमारे देश के अंगूठाटेक राजनेताओं में इतनी अक्ल कहाँ...??? वो सिर्फ अगले कुछ दिनों की योजना बनाते हैं, लंबी योजना नहीं। जब हमें पता है कि आतंकियों की मदद कई घर के भेदियों ने भी की, तो क्यों ना सबसे पहले अपने अंदर पक रहे जख्म को ही ठीक किया जाए...।। भारत सरकार को पता होना चाहिए कि सिर्फ लफ्फाजी करने से ना तो ये आतंकवाद रुकने वाला है और ना ही ये आतंकवादी..।


अंत मे यही याद आता है की :---"हर शाख पे उल्लू बैठे हैं अंजाम-ऐ-गुलिस्तान क्या होगा"