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View Full Version : मंत्री जी कपड़े बदल रहे हैं


Mahamuni
16th September 2008, 10:03 AM
बेटा मुझसे पूछ रहा है, 'पापा, जगह-जगह बम विस्फोट हो रहे हैं, लेकिन हमारे होम मिनिस्टर जी कहां सो रहे हैं?' मैंने उसे डपटते हुए कहा, 'तुम अखबार नहीं पढ़ते क्या? मंत्री जी सो थोड़े रहे हैं, वह तो कपड़े बदल रहे हैं। वैसे भी धमाकों के बीच कोई सो थोडे़ सकता है?' बेटा तल्खी से बोला, 'पापा, कपड़े बदलना ज्यादा जरूरी है या बम विस्फोट रोकना?' मैं उसे बताता हूं कि आतंकवादियों का काम बम फोड़ना है और मंत्री जी का काम दिन में कई बार सूट बदलना है। अब अगर देश में बम फूट रहे हैं तो इसका सीधा सा मतलब है कि आतंकवादियों के पास काफी बम हैं और अगर बम धमाकों के बीच मंत्री जी सूट पर सूट बदल रहे हैं तो इसका भी यही मतलब है कि उनके पास काफी सूट हैं। आतंकवादियों को बम फोड़ना सूट करता है और मंत्री जी को सूट बदलना सूट करता है। अब जो चीज जिसको सूट करती है, वह वही करेगा न?

बेटे के पल्ले मेरी बात पूरी तरह नहीं पड़ती। वह पूछने लगता है कि मंत्री जी के पास इतनी महंगाई में इतने सूट कहां से आ गए? उन्हें कितनी तनख्वाह मिलती है? क्या मंत्री जी की वाइफ को किट्टी पार्टी में सहेलियां यह ताना नहीं मारतीं कि मंत्री जी उन्हें नए-नए सूट सिलवाकर देने की बजाय अपने सूट ही सिलवाते रहते हैं? मैं बेटे को समझाते हुए कहता हूं, 'देख बेटा, मंत्री जी और उनकी वाइफ में काफी अंडरस्टैंडिंग है। उनकी वाइफ तुम्हारी मम्मी की तरह थोड़ी है कि अपने ही सूट सिलवाती रहे और मुझे पुचकार कर कहती रहे कि तुम पुराने कपड़ों में ज्यादा डैशिंग लगते हो। दूसरी बात यह है कि मंत्रियों की तनख्वाह पूछना राष्ट्रहित में नहीं होता। उनकी सेवाएं राष्ट्र के लिए अनमोल होती हैं। तीसरी बात यह है कि मंत्री जी अगर दिन में कई बार सूट बदलते हैं तो इसका मतलब साफ है कि यह देश भले ही वर्ल्ड बैंक के आगे कटोरा लेकर खड़ा रहे लेकिन सूट उत्पादन के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर है...।'

मेरी बात पूरी होने से पहले ही बेटा एक और सवाल उछाल देता है, 'पापा, हमारा मुल्क सूट उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर कैसे हो सकता है? यहां तो अभी भी ऐसे लाखों लोग हैं, जो बमुश्किल अपना तन ढक पाते हैं।' मैं उसे समझाते हुए कहता हूं कि मंत्री मुल्क की शान होते हैं। गरीब आदमी के तन पर कपड़ा हो न हो, लेकिन मंत्री जी के तन पर चमाचम सूट होना बहुत जरूरी है वरना गरीब आदमी और मंत्री जी के बीच क्या फर्क रहेगा? दूसरे देशों के लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे कि इनके मंत्रियों के पास पहनने को ढंग के कपड़े तो हैं नहीं और चले हैं परमाणु ऊर्जा तैयार करने। बेटा, मंत्रियों की पोशाक के साथ मुल्क की रेपुटेशन जुड़ी होती है।'

बेटा फिर सवाल का गोला छोड़ता है, 'पापा, बम विस्फोटों के समय क्या मंत्री जी सूट ही बदलते रहे? क्या उन्होंने कुछ और करना मुनासिब नहीं समझा?' मैंने उसे डपटते हुए कहा कि अबे ओ बेवकूफ की औलाद। अखबार नहीं पढ़ते क्या? मंत्री जी ने जितनी बार सूट बदला, उतनी बार अपने बालों की सेटिंग भी तो की। क्या मजाल कि सिर का एक बाल भी इधर से उधर हो जाता। यही नहीं, उन्होंने जितनी बार अपने बालों की सेटिंग की, उतनी ही बार अपने नए सूट के साथ नए मोजे भी पहने, यानी जिस कलर का सूट, उसी कलर का मोजा और वैसे ही मैच करते जूते। नए-नए ड्रेसेज डालने हैं तो ड्रेस सेंस भी जरूरी है न ! अब वो जमाना लद गया, जब अभिनेताओं के पहनावे देखकर मुल्क में फैशन का ट्रेंड चेंज होता था। अब अभिनेताओं का स्थान नेताओं ने ले लिया है।

बेटा लगे हाथ एक और सवाल पूछ लेता है, 'पापा, मंत्री अगर सूट बदलने में ही तल्लीन रहे तो आतंकवादियों से देशवासियों की हिफाजत कौन करेगा?' मैंने उसे प्यार से झिड़कते हुए कहा, 'अबे मूर्ख, जा स्कूल जा। अच्छे बच्चे ज्यादा सवाल नहीं पूछते।'

Jupiter
16th September 2008, 10:25 AM
:adore::adore::adore:

Raju
16th September 2008, 11:52 AM
jai ho. jai ho.

funnyfaridabadi
16th September 2008, 09:59 PM
:adore: :adore:

aaichaagho
16th September 2008, 10:54 PM
:thumbup::thumbup:

Laundebaaz
17th September 2008, 03:27 PM
धरे न अतिवादी गए पीटे पुलिस लकीर
भटक रही है दरबदर जैसे फिरे फकीर
जैसे फिरे फकीर भीख की आस लगाए
मांगे सबकी खैर दुआ का हाथ उठाए
Laundebaaz डडवाल करें वो हरकत लल्ला
जो दे अहम सुराग भला हो उसका अल्लाह

funnyfaridabadi
18th September 2008, 07:35 PM
धरे न अतिवादी गए पीटे पुलिस लकीर
भटक रही है दरबदर जैसे फिरे फकीर
जैसे फिरे फकीर भीख की आस लगाए
मांगे सबकी खैर दुआ का हाथ उठाए
Laundebaaz डडवाल करें वो हरकत लल्ला
जो दे अहम सुराग भला हो उसका अल्लाह

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